सोमवार, 8 जून 2026

हर साल बारिश में क्यों खुल जाती है सड़कों की पोल?

 लेख-

दिल्ली-एनसीआर देश का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। यहां रोजाना करोड़ों लोग सड़कों पर सफर करते हैं। पिछले दस वर्षों में एक्सप्रेसवे, फ्लाईओवर और चैड़ी सड़कों का जाल बिछा है, लेकिन मानसून की पहली तेज बारिश के साथ ही विकास के दावों की परीक्षा शुरू हो जाती है। कहीं गड्ढे उभर आते हैं, कहीं सड़क धंस जाती है और कहीं जलभराव घंटों तक यातायात को जाम कर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या केवल सड़क निर्माण की नहीं, बल्कि ड्रेनेज सिस्टम, रखरखाव और एजेंसियों के बीच समन्वय की भी है।
दिल्ली की सबसे संवेदनशील सड़कें
पिछले कई वर्षों से कुछ सड़कें मानसून के दौरान विशेष रूप से परेशानी का कारण बनती रही हैं।
1. आउटर रिंग रोड-दिल्ली की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल आउटर रिंग रोड पर बारिश के दौरान गड्ढे, जलभराव और दुर्घटनाएं लगातार चिंता का विषय रहे हैं। 2025 में भी यह राजधानी की सबसे खतरनाक सड़कों में शामिल रही।
2. रिंग रोड (इनर रिंग रोड)-दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली इस सड़क पर 2025 में सर्वाधिक सड़क मौतें दर्ज की गईं। चैड़ी सड़क और तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
3. मथुरा रोड-बारिश के दौरान गड्ढों और जलभराव की शिकायतें लगातार आती रही हैं। सड़क की सतह कई बार टूटने के कारण यातायात प्रभावित हुआ है।
4. आईटीओ और मिंटो ब्रिज क्षेत्र-यह इलाका जलभराव के लिए वर्षों से बदनाम है। तेज बारिश के दौरान यहां वाहन फंसने और लंबा जाम लगने की घटनाएं आम रही हैं।
5. एनएच-48 (दिल्ली-गुरुग्राम मार्ग)-गुरुग्राम सीमा तक फैला यह कॉरिडोर हर मानसून में जलभराव और ट्रैफिक जाम का सामना करता है।
पिछले 10 वर्षों में सबसे खतरनाक बने सड़क क्षेत्र
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की रिपोर्टों के अनुसार निम्न स्थान लगातार दुर्घटना-प्रवण रहे हैं-
आजादपुर मंडी जंक्शन
वजीराबाद क्षेत्र
कश्मीरी गेट-आईएसबीटी
भलस्वा चैक
मुकरबा चैक
लिबासपुर बस स्टैंड
राजोकरी फ्लाईओवर
अक्षरधाम एक्सप्रेसवे क्षेत्र
इन स्थानों पर सड़क की स्थिति, तेज रफ्तार, निर्माण कार्य और अव्यवस्थित यातायात दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण रहे हैं।
जान-माल का नुकसान
दिल्ली में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
2024
111 ब्लैक स्पॉट्स पर 1,132 दुर्घटनाएं
483 लोगों की मौत
649 लोग घायल
2025
25 नए ब्लैक स्पॉट चिन्हित
176 दुर्घटनाएं
88 मौतें केवल इन नए ब्लैक स्पॉट्स पर
कुल सड़क दुर्घटनाएं
2024 में 5,657 दुर्घटनाएं
1,504 घातक दुर्घटनाएं
2025 में सड़क दुर्घटना मौतें बढ़कर 1,617 तक पहुंच गईं।
हालांकि हर दुर्घटना सीधे गड्ढों से नहीं जुड़ी होती, लेकिन मानसून में खराब सड़कें, जलभराव और दृश्यता की कमी दुर्घटनाओं का जोखिम काफी बढ़ा देती हैं।
बारिश से पहले किन सड़कों को प्राथमिकता पर सुधारना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न सड़कों पर तत्काल ध्यान आवश्यक है-
प्रथम श्रेणी
आउटर रिंग रोड
मथुरा रोड
एनएच-48
आईटीओ कॉरिडोर
वजीराबाद रोड
द्वितीय श्रेणी
आजादपुर-मुकरबा चैक क्षेत्र
भलस्वा चैक
कश्मीरी गेट क्षेत्र
राजोकरी फ्लाईओवर
तृतीय श्रेणी
विभिन्न अंडरपास
कॉलोनी कनेक्टिंग रोड
औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कें
सरकारी प्रयास कितना असर?
गड्ढा-मुक्त अभियान-दिल्ली सरकार ने 2025 में एक ही दिन में 3,433 गड्ढे भरने का दावा किया। लगभग 1,400 किलोमीटर सड़क नेटवर्क पर मरम्मत अभियान चलाया गया।
जियो-टैगिंग और ड्रोन सर्वे-गड्ढों और खराब सड़कों की पहचान के लिए ड्रोन सर्वे और जियो-टैगिंग का उपयोग शुरू किया गया।
डिजिटल रोड मॉनिटरिंग-पीडब्ल्यूडी ने सड़क, जलभराव, अंधेरे क्षेत्रों और दुर्घटना-प्रवण स्थलों की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करने की पहल की है।
नई तकनीक-सीएसआईआर और सीआरआरआई द्वारा विकसित ईकोफिक्स तकनीक का परीक्षण किया गया, जिससे पानी भरे गड्ढों की भी त्वरित मरम्मत संभव है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली की अधिकांश सड़कें निर्माण गुणवत्ता से अधिक खराब ड्रेनेज व्यवस्था की वजह से क्षतिग्रस्त होती हैं। पानी का लगातार जमाव सड़क की ऊपरी परत को कमजोर कर देता है, जिससे गड्ढे बनते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। सड़कों के साथ-साथ नालों और वर्षा जल निकासी तंत्र के आधुनिकीकरण पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।
फैक्ट बॉक्स
दिल्ली-एनसीआर सड़क सुरक्षा-एक नजर

2024 के ब्लैक स्पॉट
111 ब्लैक स्पॉट दुर्घटनाएं (2024) 1,132, मौतें (2024) 483
2025 में चिन्हित नए ब्लैक स्पॉट
25, 2025 सड़क दुर्घटना मौतें 1,617, 2025 में भरे गए गड्ढे 3,433
सबसे खतरनाक सड़कें
रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, मथुरा रोड, एनएच-48
दिल्ली-एनसीआर की सड़कें देश की आर्थिक गतिविधियों की धुरी हैं, लेकिन मानसून हर वर्ष उनकी वास्तविक स्थिति उजागर कर देता है। यदि आउटर रिंग रोड, मथुरा रोड, आईटीओ, वजीराबाद और एनएच-48 जैसे संवेदनशील मार्गों पर समय रहते व्यापक मरम्मत, बेहतर ड्रेनेज और नियमित निगरानी सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में दुर्घटनाओं और आर्थिक नुकसान की कीमत और अधिक चुकानी पड़ सकती है। सड़क निर्माण के साथ-साथ सड़क रखरखाव को भी समान प्राथमिकता देना समय की मांग है।

लेखक
डाॅ. चेतन आनंद
(कवि एवं पत्रकार)


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