लीजिये १० अप्रैल को मतदान है. एक पर्व नवरात्रे ख़त्म तो दूसरा पर्व मतदान आने में बस ३६ घंटे ही बचे हैं. लेकिन नवरात्रे जैसी तैयारी कहीं दिखाई नहीं दे रही. सब तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है. बस शोर है तो उम्मीदवारों में, घबराहट है तो उम्मीदवारों में, उन्हें मतदाता अब परीक्षक नज़र आ रहा है. जनता के दरबार में टेस्ट जो होना है. तरह तरह के प्रलोभन,वादे, आश्वासन, मक्खन, मलाई, वोट मांगना, करबद्ध निवेदन, सब टोटके हो चुके। अबतो आज शाम ६ बजे वो भी काम नहीं आएंगे। बस हाथ जोड़कर घर-घर जाने का सिलसिला चल सकता है. ये ऐसी परीक्षा है जिसमे नक़ल परीक्षा के दौरान नहीं परीक्षा से पहले चलती है. कोई अटल बन मतदाताओं से आग्रह कर रहा है कि मैं आपका सेवक हूँ तो कोई अभिनेता बनकर जता रहा है कि भाई मैं ही हूँ जो आपका मनोरंजन भी कर सकता हूँ और आपके शहर की शान भी बन सकता हूँ. कोई आम आदमी बनकर अपने ४९ दिनों का बखान करने में जुटा हुआ है. शहर के एक कोने में दुबके बैठे डबकू ने अपने दोस्त नन्नू से पूछा अरे अपना कौन है, किसकी सुनें, रिक्शा चलाकर पेट ही भरते रहेंगे या केजरीवाल बनने का नंबर अपना भी आ सकता है. डबकू बोला----केजरीवाल अरे नहीं केजरीवाल बनने से क्या होगा। जैसे झाड़ू ४० से ५० दिन तक चलती है वैसे ही केजरी मियां की सरकार चली, वादे इतने बड़े-बड़े कर लिए जनता से कि पूरा करने के टाइम पसीने छूट गए हुज़ूर के, भाग गए मैदान से. अब शास्त्री जी का हवाला देकर अपनी करतूत छिपाने में लगे हुए हैं, नहीं भाई नहीं बनना केजरीवाल, नन्नू बोला अच्छा तो फिर राहुल गांधी बन लेते हैं, उसका तो जलवा है, अरे नहीं, डबकू बोला- राहुल तो बस रोबोट है, रिमोट तो उनकी माता जी के पास है, जैसे चाहतीहैं चला लेती हैं. अब तू बनेगा रोबोट? नन्नू ने मुंह में ऊँगली दबाते हुए कहा न---हीं.... औरमोदी, उसकी तो हवा है न, मोदी बनकर देश की सेवा करेंगे, मोदी------? मोदी खुद कुछ नहीं बन पा रहे, जनता पर दबाव बहुत है, सुबह से लेकर रात तक बस मोदी ही मोदी, टीवी के जिस चैनल को खोल लो वहाँ मोदी, सोशल साइट्स पर देख लो वहाँ मोदी, एफबी पर मोदी, ट्विटर पर मोदी, गली में मोदी, चौराहों और राजमार्गो पर मोदी, चर्चा में कोई नहीं है, बस शोर ही शोर है. इसलिए मोदी बनने से पहले देख ले कि मोदी बनकर कितने लोग तुझे अपनाएंगे। वैसेएक बात कहूंगा नन्नू तू कुछ बने न बने मगर वोट ज़रूर करियो, देश के विकास में तेरी ही नहीं सबकी भागीदारी बहुत ज़रूरी है. चल रिक्शा पकड़ देख सवारी आ रही है.
चेतन आनंद

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें