विशेष लेख-
ग़ाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रमुख नगर है, जो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटा हुआ है। इसे “उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार” कहा जाता है। यह नगर न केवल दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा है, बल्कि औद्योगिक, शैक्षिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग़ाज़ियाबाद की पहचान आज एक आधुनिक औद्योगिक शहर के रूप में है, परन्तु इसका इतिहास अत्यंत पुराना और गौरवशाली है।
प्राचीन काल में ग़ाज़ियाबाद-ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि ग़ाज़ियाबाद क्षेत्र प्राचीन काल में हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ के बीच स्थित था। महाभारत काल में यह इलाका कूर्म क्षेत्र या कुर्मांचल प्रदेश के नाम से जाना जाता था। कुछ विद्वानों का मत है कि इस क्षेत्र का उल्लेख महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भी मिलता है, जहाँ इसे “हिन्डन नदी के तटवर्ती जनपद” के रूप में वर्णित किया गया है। हिन्डन नदी, जो आज भी शहर के मध्य से बहती है, प्राचीन सभ्यताओं के लिए जीवनरेखा रही। इस नदी के किनारे मानव बसावट के पुरातात्त्विक अवशेष मिले हैं, जो 2500 वर्ष से अधिक पुराने माने जाते हैं।
मध्यकालीन इतिहास-मध्यकाल में यह क्षेत्र गंगा-यमुना दोआब का हिस्सा था, जिस पर कई शासकों ने अधिकार जमाया। यह इलाका दिल्ली सल्तनत और बाद में मुग़ल साम्राज्य के अधीन रहा। इस क्षेत्र के गाँव और कस्बे कृषि, व्यापार और हस्तकला के लिए प्रसिद्ध थे। 18वीं सदी में मुग़ल शासन के पतन के समय यहाँ मराठों और रोहिल्लों के बीच कई बार संघर्ष हुए। इसी समय एक प्रमुख व्यक्तित्व ग़ाज़ीउद्दीन ने इस क्षेत्र में अपना किला और सराय बनवाई।
ग़ाज़ियाबाद की स्थापना-ग़ाज़ियाबाद नगर की स्थापना सन् 1740 ईस्वी में ग़ाज़ीउद्दीन, जो नवाब शुजाउद्दौला के दरबार में एक सरदार थे, ने की थी। उन्होंने यहाँ एक सराय, मस्जिद और किला बनवाया और नगर का नाम अपने नाम पर ग़ाज़ीउद्दीन नगर रखा। समय के साथ यह नाम संक्षेप में ग़ाज़ियाबाद के रूप में प्रचलित हो गया।
ब्रिटिश काल और 1857 की क्रांति-ब्रिटिश शासन के समय ग़ाज़ियाबाद की भौगोलिक स्थिति अत्यंत रणनीतिक मानी गई क्योंकि यह दिल्ली और मेरठ के बीच स्थित था। 1860 में जब दिल्ली से मेरठ को जोड़ने वाला रेलवे मार्ग बना, तो ग़ाज़ियाबाद स्टेशन एक प्रमुख जंक्शन बन गया। 1857 की पहली स्वतंत्रता संग्राम में ग़ाज़ियाबाद का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेरठ में जब विद्रोह शुरू हुआ, तो विद्रोही सैनिक दिल्ली की ओर जाते हुए ग़ाज़ियाबाद से गुज़रे। यहाँ स्थानीय जनता ने भी उनका सहयोग किया। अंग्रेज़ों के विरुद्ध हुई कई छोटी-बड़ी झड़पों में इस क्षेत्र के अनेक वीरों ने प्राणों की आहुति दी।
आधुनिक ग़ाज़ियाबाद का विकास-स्वतंत्रता के बाद ग़ाज़ियाबाद का तीव्र औद्योगिकीकरण हुआ। 1940-1950 के दशक में यहाँ कई बड़े उद्योग स्थापित हुए, जैसे-मऐदी इंडस्ट्रीज, डाबर, आईटीसी, जुबली पेंट्स आदि। 1970 के दशक में इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा घोषित किया गया, जिससे इसकी प्रशासनिक और आर्थिक स्थिति में बड़ा परिवर्तन आया। 1980 के बाद यहाँ रियल एस्टेट और शिक्षा का विस्तार हुआ। इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रबंधन संस्थान और विश्वविद्यालय स्थापित हुए। 2000 के दशक में दिल्ली मेट्रो के विस्तार और हाईवे नेटवर्कए एनएच-9, एनएच-24, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ने ग़ाज़ियाबाद को राष्ट्रीय राजधानी से लगभग एकीकृत कर दिया।
प्रमुख ऐतिहासिक स्थल-मोहम्मदाबाद किला (ग़ाज़ीउद्दीन का किला) स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण। सराय नगर, प्राचीन यात्रियों का विश्राम स्थल, जहाँ से शहर का नाम पड़ा। दशना देवी मंदिर, स्थानीय धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र। हिन्डन नदी तट, पुरातात्त्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल जहाँ अनेक प्राचीन अवशेष मिले हैं। मोहन नगर, प्रसिद्ध औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्र, जिसे मोदीनगर परिवार ने विकसित किया।
प्रशासनिक और जनसांख्यिक स्थिति-ग़ाज़ियाबाद पहले मेरठ जिले का हिस्सा था। बाद में 14 नवंबर 1976 को इसे स्वतंत्र जिला घोषित किया गया। कुल तहसीलें, गाज़ियाबाद, मोदीनगर, लोनी, मुरादनगर और धौलाना (कुछ पुनर्गठनों के बाद)। भाषा, हिन्दी (मुख्य), उर्दू और हरियाणवी बोली का भी प्रभाव। मुख्य उद्योग, इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटो पार्ट्स और रियल एस्टेट।
शिक्षा और संस्कृति-ग़ाज़ियाबाद आज शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। यहाँ राजा हरि सिंह कॉलेज, एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज, आईएमटी गाज़ियाबाद, आईटीएस, काईट, आईएमएस, मेवाड़ और कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे उच्च शिक्षण संस्थान हैं। सांस्कृतिक रूप से यह नगर दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है। यहाँ हर साल रामलीला महोत्सव, नवरात्रि मेले और कला प्रदर्शनियाँ, कवि सम्मेलन, मुशायरे आयोजित होते हैं।
वर्तमान ग़ाज़ियाबाद-आज ग़ाज़ियाबाद भारत के सबसे तेजी से विकसित होते शहरों में गिना जाता है। यह दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर का केंद्र है और औद्योगिक-आवासीय संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बन रहा है। यहाँ इंदिरापुरम, राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग रिपब्लिक और वैभव खंड जैसे आधुनिक आवासीय क्षेत्र विकसित हुए हैं। हालांकि, तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ यहाँ यातायात जाम, प्रदूषण, अवैध निर्माण और जलसंकट जैसी चुनौतियाँ भी सामने हैं। प्रशासन और नागरिक संस्थाएँ मिलकर इनके समाधान की दिशा में काम कर रही हैं।
ग़ाज़ियाबाद का इतिहास केवल स्थापत्य या राजनीतिक घटनाओं का नहीं, बल्कि एक सतत विकास की गाथा है। यह नगर उस भारत का प्रतीक है, जिसने परंपरा और आधुनिकता को एक साथ सँजोया है। जहाँ एक ओर इसकी नींव मुगलकालीन सराय पर टिकी है, वहीं दूसरी ओर इसकी पहचान आधुनिक औद्योगिक और शैक्षिक नगरी के रूप में है। आज का ग़ाज़ियाबाद एक ऐसा नगर है जिसने इतिहास को सहेजते हुए आधुनिक भारत की गति को अपनाया है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
प्राचीन काल में ग़ाज़ियाबाद-ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि ग़ाज़ियाबाद क्षेत्र प्राचीन काल में हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ के बीच स्थित था। महाभारत काल में यह इलाका कूर्म क्षेत्र या कुर्मांचल प्रदेश के नाम से जाना जाता था। कुछ विद्वानों का मत है कि इस क्षेत्र का उल्लेख महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भी मिलता है, जहाँ इसे “हिन्डन नदी के तटवर्ती जनपद” के रूप में वर्णित किया गया है। हिन्डन नदी, जो आज भी शहर के मध्य से बहती है, प्राचीन सभ्यताओं के लिए जीवनरेखा रही। इस नदी के किनारे मानव बसावट के पुरातात्त्विक अवशेष मिले हैं, जो 2500 वर्ष से अधिक पुराने माने जाते हैं।
मध्यकालीन इतिहास-मध्यकाल में यह क्षेत्र गंगा-यमुना दोआब का हिस्सा था, जिस पर कई शासकों ने अधिकार जमाया। यह इलाका दिल्ली सल्तनत और बाद में मुग़ल साम्राज्य के अधीन रहा। इस क्षेत्र के गाँव और कस्बे कृषि, व्यापार और हस्तकला के लिए प्रसिद्ध थे। 18वीं सदी में मुग़ल शासन के पतन के समय यहाँ मराठों और रोहिल्लों के बीच कई बार संघर्ष हुए। इसी समय एक प्रमुख व्यक्तित्व ग़ाज़ीउद्दीन ने इस क्षेत्र में अपना किला और सराय बनवाई।
ग़ाज़ियाबाद की स्थापना-ग़ाज़ियाबाद नगर की स्थापना सन् 1740 ईस्वी में ग़ाज़ीउद्दीन, जो नवाब शुजाउद्दौला के दरबार में एक सरदार थे, ने की थी। उन्होंने यहाँ एक सराय, मस्जिद और किला बनवाया और नगर का नाम अपने नाम पर ग़ाज़ीउद्दीन नगर रखा। समय के साथ यह नाम संक्षेप में ग़ाज़ियाबाद के रूप में प्रचलित हो गया।
ब्रिटिश काल और 1857 की क्रांति-ब्रिटिश शासन के समय ग़ाज़ियाबाद की भौगोलिक स्थिति अत्यंत रणनीतिक मानी गई क्योंकि यह दिल्ली और मेरठ के बीच स्थित था। 1860 में जब दिल्ली से मेरठ को जोड़ने वाला रेलवे मार्ग बना, तो ग़ाज़ियाबाद स्टेशन एक प्रमुख जंक्शन बन गया। 1857 की पहली स्वतंत्रता संग्राम में ग़ाज़ियाबाद का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेरठ में जब विद्रोह शुरू हुआ, तो विद्रोही सैनिक दिल्ली की ओर जाते हुए ग़ाज़ियाबाद से गुज़रे। यहाँ स्थानीय जनता ने भी उनका सहयोग किया। अंग्रेज़ों के विरुद्ध हुई कई छोटी-बड़ी झड़पों में इस क्षेत्र के अनेक वीरों ने प्राणों की आहुति दी।
आधुनिक ग़ाज़ियाबाद का विकास-स्वतंत्रता के बाद ग़ाज़ियाबाद का तीव्र औद्योगिकीकरण हुआ। 1940-1950 के दशक में यहाँ कई बड़े उद्योग स्थापित हुए, जैसे-मऐदी इंडस्ट्रीज, डाबर, आईटीसी, जुबली पेंट्स आदि। 1970 के दशक में इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा घोषित किया गया, जिससे इसकी प्रशासनिक और आर्थिक स्थिति में बड़ा परिवर्तन आया। 1980 के बाद यहाँ रियल एस्टेट और शिक्षा का विस्तार हुआ। इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रबंधन संस्थान और विश्वविद्यालय स्थापित हुए। 2000 के दशक में दिल्ली मेट्रो के विस्तार और हाईवे नेटवर्कए एनएच-9, एनएच-24, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ने ग़ाज़ियाबाद को राष्ट्रीय राजधानी से लगभग एकीकृत कर दिया।
प्रमुख ऐतिहासिक स्थल-मोहम्मदाबाद किला (ग़ाज़ीउद्दीन का किला) स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण। सराय नगर, प्राचीन यात्रियों का विश्राम स्थल, जहाँ से शहर का नाम पड़ा। दशना देवी मंदिर, स्थानीय धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र। हिन्डन नदी तट, पुरातात्त्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल जहाँ अनेक प्राचीन अवशेष मिले हैं। मोहन नगर, प्रसिद्ध औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्र, जिसे मोदीनगर परिवार ने विकसित किया।
प्रशासनिक और जनसांख्यिक स्थिति-ग़ाज़ियाबाद पहले मेरठ जिले का हिस्सा था। बाद में 14 नवंबर 1976 को इसे स्वतंत्र जिला घोषित किया गया। कुल तहसीलें, गाज़ियाबाद, मोदीनगर, लोनी, मुरादनगर और धौलाना (कुछ पुनर्गठनों के बाद)। भाषा, हिन्दी (मुख्य), उर्दू और हरियाणवी बोली का भी प्रभाव। मुख्य उद्योग, इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटो पार्ट्स और रियल एस्टेट।
शिक्षा और संस्कृति-ग़ाज़ियाबाद आज शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। यहाँ राजा हरि सिंह कॉलेज, एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज, आईएमटी गाज़ियाबाद, आईटीएस, काईट, आईएमएस, मेवाड़ और कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे उच्च शिक्षण संस्थान हैं। सांस्कृतिक रूप से यह नगर दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है। यहाँ हर साल रामलीला महोत्सव, नवरात्रि मेले और कला प्रदर्शनियाँ, कवि सम्मेलन, मुशायरे आयोजित होते हैं।
वर्तमान ग़ाज़ियाबाद-आज ग़ाज़ियाबाद भारत के सबसे तेजी से विकसित होते शहरों में गिना जाता है। यह दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर का केंद्र है और औद्योगिक-आवासीय संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बन रहा है। यहाँ इंदिरापुरम, राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग रिपब्लिक और वैभव खंड जैसे आधुनिक आवासीय क्षेत्र विकसित हुए हैं। हालांकि, तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ यहाँ यातायात जाम, प्रदूषण, अवैध निर्माण और जलसंकट जैसी चुनौतियाँ भी सामने हैं। प्रशासन और नागरिक संस्थाएँ मिलकर इनके समाधान की दिशा में काम कर रही हैं।
ग़ाज़ियाबाद का इतिहास केवल स्थापत्य या राजनीतिक घटनाओं का नहीं, बल्कि एक सतत विकास की गाथा है। यह नगर उस भारत का प्रतीक है, जिसने परंपरा और आधुनिकता को एक साथ सँजोया है। जहाँ एक ओर इसकी नींव मुगलकालीन सराय पर टिकी है, वहीं दूसरी ओर इसकी पहचान आधुनिक औद्योगिक और शैक्षिक नगरी के रूप में है। आज का ग़ाज़ियाबाद एक ऐसा नगर है जिसने इतिहास को सहेजते हुए आधुनिक भारत की गति को अपनाया है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
लेखक
डॉ. चेतन आनंद
(कवि-पत्रकार)
डॉ. चेतन आनंद
(कवि-पत्रकार)




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